अजय कुमार लल्लू

उप्र कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय लल्लू किसी पहचान के मोहताज नहीं है। आएं दिन किसी न किसी मुद्दे पर संघर्ष करते हुए उनको सड़कों पर देखा जा सकता है। लेकिन उनकी इस यात्रा के अनेकों आयाम है, बड़ी परिश्रम,अनेकों संघर्ष व जेल यात्राओं के बाद आज अजय लल्लू जी इस मुकाम पर है।

उप्र के कुशीनगर जनपद के सेवरही नगर के एक पिछड़ा परिवार में जन्मे अजय लल्लू ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा स्थानीय प्राथमिक विद्यालय एवं सेवरही के ही लोकमान्य इंटरमीडियट कालेज से हाईस्कूल – इंटरमीडियट की शिक्षा ग्रहण की। इसके पश्चात आगे की पढ़ाई के लिए लल्लू ने सेवरहीं के किसान पीजी कॉलेज में स्नातक में दाखिला लिया। कभी क्रिकेट के मैदान में अच्छे आल राउंडर के तौर पर पहचान रखने वाले लल्लू की राजनीतिक पाठशाला की शुरुवात भी किसान पीजी कॉलेज से ही शुरू हुई। कालेज से विद्यार्थियों के फीस वृद्धि ,बेंच सहित अन्य लड़ाई लड़ते हुए कालेज के छात्रसंघ का महामंत्री और बाद में छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए।

छात्र राजनीति की आग में तपे लल्लू गांधी के पुराने ढर्रे पर चलकर मुख्यधारा की राजनीति में आ गए उन्हें इसका अंदाजा भी नहीं हुआ। लल्लू के प्रखर आंदोलन की आग क्षेत्र के लोगों तक जाने लगी और लल्लू भी बिजली,पानी ,सड़क ,पुलिसिया दमन के ख़िलाफ़ आम आदमी की आवाज बनने लगे। इस दौरान अनेकों मुकदमे,जेल,सरकारी यातनाओं से भरी रात लल्लू ने थानों में काटी।

धरना कुमार के नाम से प्रसिद्ध लल्लू ने अपने जीवन का पहला विधानसभा चुनाव निर्दलीय के रूप में 2007 में लड़ा लेकिन असफल हो रहे। घर की माली हालत खराब रही,आर्थिक मजबूरीयों ने लल्लू को राजनीति का अखाड़ा छोड़ दिल्ली के झुग्गियों में रहने और मजदूरी करने पर मजबुर कर दिया।

वो कहते है न कि जब सितारे बुलंद हो तो मंजिले भी राही का इंतज़ार करती है।

लल्लू के जीवन पर यह चंद लाइनें खूब बैठती है। दिल्ली में लल्लू नहीं रुके,क्षेत्र के लोगों के कहने पर लल्लू वापस अपने क्षेत्र लौट आए और फिर वही आंदोलन का दौर शुरू हुआ।

लल्लू ने कांग्रेस से जुड़कर 2012 का विधानसभा चुनाव लड़ा और जीते और फिर 2017 में भाजपा के भारी प्रचंड लहर में 18500 मतों से विधानसभा पहुंचे तो राहुल गांधी ने पूर्वांचल के इस धरना कुमार को सदन में कांग्रेस का नेता चुना। लगातार आंदोलनों,जनहित के मुद्दों पर संघर्ष को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने लल्लू को उ प्र कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त किया और आज वो दिनों रात अपने पार्टी के लिए सड़क से सदन तक संघर्षरत है।