कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने हमेशा देश के हर नागरिक की सुरक्षा और संरक्षा को सबसे जरुरी माना है। 10 साल के यूपीए शासनकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा खर्च में काफी वृद्धि देखी गयी, 2004-05 में ये 77,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2012-13 तक 1,93,407 करोड़ रुपये हो गया।

 

रोजगार की दर का सीधा संबंध देश के विकास से है। कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान इसी तरह की प्रवृत्ति देखने को मिली, जब 2004-10 के दौरान रोजगार ग्राफ काफी बढ़ा और सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रों को ठोस और सतत विकास का अनुभव हुआ।


कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार का मानना है कि देश तब तक प्रगति नहीं कर सकता, जब तक कि किसान को उसकी उपज का सही दाम न मिले। गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2004-05 के 640 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 2011-12 तक दोगुने से ज्यादा 1,285 रुपये किया गया था। इसी तरह, 2003-04 में धान का एमएसपी 560 रुपये से बढ़ाकर 2011-12 तक 1250 रुपये प्रति क्विंटल किया गया था।


भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने हमेशा शिक्षा को उच्च प्राथमिकता पर रखा है। अधिकतम लोगों तक इसकी पहुंच के लिये यूपीए-1 और यूपीए-2 दोनों सरकारों ने गहन और सक्रिय दृष्टिकोण बनाये रखा। शिक्षा (प्राथमिक, माध्यमिक और विश्वविद्याल स्तर) के लिए आवंटित सकल घरेलू उत्पाद का हिस्सा 2004-2005 के 3.29 प्रतिशत से बढ़ाकर 2012-13 तक 3.83 प्रतिशत किया गया।


भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने सरकारी वित्त पोषित कार्यक्रमों के ज़रिये बेहतरीन और किफायती स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं तक आसान पहुंच प्रदान करने का सदैव ठोस प्रयास किया है। देश के सकल घरेलू उत्पाद में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय का हिस्सा 2000-01 के 0.13 प्रतिशत से बढ़ाकर 2010-11 तक 0.26 प्रतिशत किया गया। वर्ष 2012-13 में स्वास्थ्य देखभाल बजट के लिये 24,261 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि आवंटित की गयी थी।


कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को पता था कि भारत को आर्थिक ताकत बनाने के लिए देश में महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं को विकसित करने की जरूरत है। इस विशाल लक्ष्य को हासिल करने के लिये सकल घरेलू उत्पाद में बुनियादी ढांचे के खर्च का हिस्सा 2004-05 के 4.69 प्रतिशत से बढ़ाकर 2010-11 तक 8.41 प्रतिशत किया गया।


कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने दृढ़ निश्चय के साथ विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं का प्रारुप तैयार किया और उन्हें लागू किया, इसके नतीजे सभी के सामने हैं। 10 वर्षों के यूपीए शासनकाल के दौरान सामाजिक क्षेत्र पर खर्च के प्रतिशत में काफी सुधार हुआ। सामाजिक व्यय के लिए आवंटित जीडीपी का हिस्सा 2003-2004 में 5.41 प्रतिशत से बढ़ाकर 2012-13 तक 6.80 प्रतिशत किया गया।