गोविंद वल्लभ भाई पंत

गोविंद वल्लभ भाई पंत उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री थे। इनका जन्म 10 सिंतबर 1887 को खूंट गांव अल्मोड़ा के पास हुआ था। इनकी छवि एक पढ़े लिखे समझदार बहुमुखी प्रतिभा के धनी के रूप में थी। इनका मुख्यमंत्री पद पर कार्यकाल जनवरी 1950 से दिसंबर 1954 तक रहा। 

1914 में काशीपुर में ‘प्रेमसभा’ की स्थापना पंत ने करवाई और इन्हीं की कोशिशों से ही ‘उदयराज हिन्दू हाईस्कूल’ की स्थापना हुई। 1916 में पंत जी काशीपुर की नोटीफाइड ऐरिया कमेटी में शामिल हुए ।  
1921, 1930, 1932 और 1934 के स्वतंत्रता संग्रामों में पंत जी लगभग 7 वर्ष जेलों में रहे । साइमन कमीशन के आगमन के खिलाफ़ जुलूस में लाला लाजपत राय को बचाने दौरान प्रदर्शन में अंग्रेजों के लाठीचार्ज से पंत को गंभीर चोटें आईं थीं। पंत ने काकोरी कांड में शामिल राम प्रसाद विस्मिल, अश्फाक खान का केस भी लड़ा था. गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 के तहत चुनाव में यूनाइटेड प्रोविन्सेस (उत्तर प्रदेश) के मुख्यमंत्री 17 जुलाई 1937 से 1939 तक तथा 1946 के दुबारा चुनाव में 1 अप्रैल 1946 से 25 जनवरी 1950 तक मुख्यमंत्री रहे। पंत जी  आज़ाद भारत मे कुल 4 साल और 335 दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। 
1955 से 1961 तक होम मिनिस्टर रहे। इस दौरान इनकी उपलब्धि रही भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन। महिलाओ को सम्पति व तलाक का अधिकार, ज़मीदारी प्रथा उन्मूलन तथा हिन्दू कोड बिल पारित कराने में उनकी अहम भूमिका रही। राज्य का नाम यूनाइटेड प्रोविन्सेस से उत्तर प्रदेश होगा यह सुझाव पंत का ही था। हिंदी को राजकीय भाषा का दर्जा दिलाने  व अन्य कुछ राज्यो में हिंदी को राज्यभाषा के रूप में शामिल करने को लेकर पंत जी का योगदान उलेखनीय है। 26 जनवरी 1957 में इनको भारत रत्न से समान्नित किया गया था ।


डॉक्टर सम्‍पूर्णानन्‍द

(जन्म- 1 जनवरी 1891 मृत्यु: 10 जनवरी 1969)

डॉ सम्‍पूर्णानन्‍द उत्तर प्रदेश के दूसरे कांग्रेसी मुख्यमंत्री थे। बनारस में 1 जनवरी 1890 को डॉ सम्‍पूर्णानन्‍द का जन्म हुआ था। पढ़ाई क्वीन्स कॉलेज से हुई, आगे की पढ़ाई वृदांवन और बीकानेर में हुई। उन्होंने हिंदी में मैगजीन निकालने के साथ अंग्रेजी में भी ‘टुडे’ नाम से मैगजीन निकाली। संपूर्णानंद हिंदी, संस्कृत, खगोलशास्त्र में बहुत रुचि रखते थे। राजस्थान के राज्यपाल बनने के बाद उनका जुड़ाव योग और दर्शन में भी हुआ
बनारस के काशी विद्यापीठ में अध्यापन का काम भी किया। सम्‍पूर्णानन्‍द शिक्षक और राजनेता दोनों थे। वे स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलनो में भी हिस्सा लेते थे। गवर्मेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 के तहत चुनाव में विधान सभा में चुने गए। आगे चल कर आज़ाद भारत मे होम मिनिस्ट्री,फाइनेंस मिनिस्ट्री भी संभाली।
1954 में गोविंद बल्लभ पंत केंद्र में चले गए जिसके बाद सम्‍पूर्णानन्‍द को मुख्यमंत्री बनाया गया,इनका कार्यकाल 1960 तक रहा। 10 जनवरी, 1969 को डॉक्टर सम्‍पूर्णानन्‍द का बनारस में ही निधन हो गया।


चंद्रभानु गुप्ता 

(जन्म- 14/07/1902 मृत्यु: 11/03/1980)

चंद्रभानु गुप्ता उत्तर प्रदेश के तीसरे कांग्रेसी मुख्यमंत्री थे। 14 जुलाई 1902 को अलीगढ़ के बिजौली में चंद्रभानु गुप्ता का जन्म हुआ। 17 बरस की उम्र में स्‍वतंत्रता आंदोलनों में भाग लिया। सीतापुर में रौलेट एक्ट के खिलाफ प्रदर्शन में शामिल हुए व जेल गये, चंद्रभानु गुप्ता पूरे स्वतंत्रता आंदोलन में कुल 10 बार जेल गये थे।
इसी दौरान काकोरी काण्ड के क्रांतिकारियों के बचाव दल के वकीलों में वल्लभ भाई पंत के साथ भी रहे।  1926 में उत्तर प्रदेश कांग्रेस और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सदस्य बने, 1937 में उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य चुने गए फिर स्वतन्त्रता के बाद 1946 में बनी पहली प्रदेश सरकार में गोविंद बल्लभ पंत के मंत्रिमंडल में पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी के रूप में सम्मिलित हुए।
1960 में चंद्रभानु गुप्ता यूपी के मुख्यमंत्री बने। उस वक्त रानीखेत दक्षिण से विधायक थे। चंद्रभानु गुप्ता जी तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री रहे । इनका पहला कार्यकाल 1960 से 1963 तक था। 1967 में फिर से 19 दिनों के लिए मुख्यमंत्री बने। तीसरी बार 1969 में मुख्यमंत्री बने और करीब एक साल तक इस पद पर बने रहे। विरोधियों ने इनपर हमेशा आरोप लगाया कि चंद्रभानुगुप्ता ने खूब पैसा बनाया है, लेकिन जब 11 मार्च 1980 को उनका देहांत हुआ तो मालूम चला उनके अकाउंट में मात्र दस हजार रुपये थे।


सुचेता कृपलानी

(जन्म- 25/06/1904  मृत्यु: 01/12/1974)

सुचेता कृपलानी भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री थीं। वह एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी एवं राजनीतिक थी। 
सुचेता कृपलानी की पढ़ाई-लिखाई इंद्रप्रस्थ और सेंट स्टीफेंस से हुई।  फिर बीएचयू में इतिहास से लेक्चरार हो गईं। 1936 में प्रसिद्ध गांधीवादी नेता आचार्य जे बी कृपलानी से शादी हुई।  
1942 में उषा मेहता औऱ अरुणा आसफ अली के साथ भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल हुईं। ये तीन औरतें ही इस आंदोलन में सबसे ज्यादा चर्चित रहीं। स्वतंत्रता आंदोलन इनका योगदान उल्लेखनीय है। 
जब आजादी के वक्त नोआखाली में दंगे हुए, तब महात्मा गांधी के साथ वहां सुचेता ही गई थीं। 1940 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की महिला शाखा- “अखिल भारतीय महिला कांग्रेस” की स्थापना का  श्रेय सुचेता कृपलानी को जाता है। 
1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रियता के कारण एक साल के लिए जेल भी गईं। 1946 में संविधान सभा की सदस्या चुनी गईं। कांग्रेस में लगातार सक्रिय रहने के बाद वो 1958 में कांग्रेस की महासचिव बनी तथा 1960 तक महासचिव रहीं और फिर 1963 में उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। 1971 में सुचेता राजनीति से रिटायर हो गईं। 1974 में उनका निधन हो गया। 
वह उन चंद महिलाओं में शामिल थी जिन्होंने बापू के करीब रहकर देश की आज़ादी की नींव रखी। 


कमलापति त्रिपाठी

(जन्म- 03/09/1905 मृत्यु: 08/10/1990)

कमलापति त्रिपाठी का जन्म 3 सितंबर 1905 को बनारस में हुआ था। उनका शिक्षा दीक्षा काशी विद्यापीठ से हुआ। जहाँ से उन्होंने शास्त्री और डीलिट की उपाधियां प्राप्त किया, फिर अखबार ‘आज’ में पत्रकार के तौर पर अपना करियर शुरू किया। 16 की उम्र में असहयोग आंदोलन के दौरान जेल गये,1937 के चुनाव में विधानसभा में चुने गये।
वह 1946, 1952, 1957, 1962 और 1969 के विधानसभा में भी चुने गये थे।  साथ ही संविधान सभा के भी सदस्य रहे ।
4 अप्रैल 1971 को यूपी के मुख्यमंत्री बने।
कमलापति त्रिपाठी 1973-78, 78-80, 85-86 में राज्यसभा के सदस्य रहे और 1980-84 में लोकसभा के  सदस्य रहे। 1973-77 तक रेल मंत्री व 1977-80 राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे। 8 अक्टूबर 1990 को कमलापति त्रिपाठी का निधन हो गया।


हेमवती नंदन बहुगुणा

(जन्म- 25/04/1919 मृत्यु: 17/03/1989)

हेमवती नंदन बहुगुणा जी उत्तर प्रदेश के दो बार मुख्यमंत्री रहे। हेमवती नंदन जी का जन्म उत्तराखंड के बुघाणी  में 25 अप्रैल, 1919 को हुआ था। 
1936 से 1942 तक हेमवती नंदन जी छात्र आंदोलनों में सक्रिय रहे तथा 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में शामिल रहे। अंग्रेजों ने उन पर जिंदा या मुर्दा पकड़ने पर 5 हजार का इनाम रखा था। 1 फरवरी 1943 को दिल्ली के जामा मस्जिद के पास हेमवती नंदन जी गिरफ्तार भी हुए थे। 
1952 से वो लगातार यूपी कांग्रेस कमिटी के सदस्य रहे व 1957 में पार्लियामेंट्री सेक्रेटरी रहे। 1963 से 1969 तक यूपी कांग्रेस महासचिव के पद पर रहे तथा 1967 में आम चुनाव के बाद बहुगुणा को अखिल भारतीय कांग्रेस का महामंत्री चुना गया। हेमवती नंदन जी पहली बार 8 नवम्बर 1973 से 4 मार्च 1974 तथा दूसरी बार 5 मार्च 1974 से 29 नवम्बर 1975 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। 
इसके इतर 1971, 1977 तथा 1980 में सांसद बने।
1977 में वे केंद्रीय मंत्रि मण्डल में पेट्रोलियम, रसायन तथा उर्वरक मंत्री भी रहे थे।  वर्ष 1979 में केन्द्रीय वित्त मंत्री भी बने। 17 मार्च, 1989 को हेमवती नंदन बहुगुणा जी का निधन हो गया।


नारायण दत्त तिवारी

(जन्म- 18/10/1925 मृत्यु: 18/10/2018)

नारायण दत्त तिवारी जी उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड (तब उत्तरांचल) के मुख्यमंत्री रहे। एनडी तिवारी जी का जन्म 18 अक्टूबर, 1925 को नैनीताल के बलूती गांव में हुआ। पिता पूर्णानंद तिवारी वन विभाग में अफसर थे, जिन्होंने असहयोग आंदोलन के दौरान नौकरी छोड़ दी थी। नारायण दत्त तिवारी जी हलद्वानी, बरेली और नैनीताल के अलग-अलग स्कूल-कॉलेजों में पढ़े। 
14 दिसंबर 1942 को अरेस्ट हुए और नैनीताल की उसी जेल में भेजे गए, जहां उनके पिता पहले से बंद थे। 15 महीने बाद रिहा हुए, तो इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया। 1947 में स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष बने। 1945-49 के बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट कांग्रेस के सेक्रेटरी रहे।  इसके बाद यूपी में 1952 में हुए पहले इलेक्शन में नैनीताल से जीतकर विधायक बने। 1957 में नैनीताल से जीते और असेंबली में विपक्ष के नेता बने। 1963 में काशीपुर से विधायक बने और यूपी सरकार में मंत्री बने। 1968 में नेहरू युवा केंद्र की स्थापना की, जो एक वॉलंटरी ऑर्गनाइजेशन है। 
1969 से 1971 के बीच इंडियन यूथ कांग्रेस के पहले अध्यक्ष रहे। नारायण दत्त तिवारी जी तीन बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री (1976-77, 1985-85, 1988-89) रहे और एक बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री (2002-2007) रहे। 1979 से 1980 के बीच चौधरी चरण सिंह की सरकार में वित्त और संसदीय कार्य मंत्री रहे। 1980 के बाद योजना आयोग के डिप्टी चेयरमैन रहे और 1985-88 में राज्यसभा सांसद रहे साथ ही 1985 में उद्योग मंत्री भी रहे। 1986 से 1987 के बीच राजीव गांधी की कैबिनेट में विदेश-मंत्री व 87 से 88 फाइनेंस और कॉमर्स मंत्री भी का पद  ही सम्भाला। 
2007 से 2009 के बीच वो आंध्र प्रदेश के गवर्नर थे। नारायण दत्त तिवारी जी का निधन 18 अक्टूबर, 2018 को हुआ । 


विश्वनाथ प्रताप सिंह

(जन्म- 25/06/1931 मृत्यु: 27/11/2008)

विश्वनाथ प्रताप सिंह जी का जन्म  25 जून 1931,इलाहाबाद के एक जमींदार परिवार में हुआ था। पढ़ाई की शुरुआत देहरादून के कैंब्रिज स्कूल से हुई थी, आगे की पढ़ाई इलाहाबाद से पूरा किया। इसके बाद आगे की पढ़ाई  पुणे विश्वविद्यालय से हुई। पढाई के समय से ही इन्हें राजनीति में रुझान रहा, वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष रहे, इसके अलावा इलाहबाद विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष भी रहे।
1969 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ली। उसी वर्ष उत्तर प्रदेश की विधानसभा के सदस्य बनाये गए तथा 1971 में सांसद बने। 1974 में इन्दिरा गांधी ने इन्हें  केंद्रीय वाणिज्य उप मंत्री बना दिया था। विश्वनाथ प्रताप सिंह जी ने 1976-1977 तक इस पद को संभाला।
1980 में लोकसभा सदस्य बने और उसी वर्ष  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। मुख्यमंत्री के पद पर 1982 तक रहे, इसके बाद वापस 1983 में इन्होने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री  का पद सम्भाला।  27 नवंबर 2008 को 77 वर्ष की उम्र में विश्वनाथ प्रताप  सिंह जी का निधन हो गया।


श्रीपति मिश्रा

(जन्म-20/01/1924 मृत्यु: 07/12/2002)

श्रीपति मिश्रा जी का जन्म उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के गांव शेषपुर में हुआ। पिता रामप्रसाद मिश्रा राजवैद्य थे, शुरुआती पढ़ाई के बाद वो बनारस चले गए। वहीं पढ़ाई के दौरान ही छात्र आंदोलन में आ गए। 1941 बीएचयू में यूनियन के सचिव चुने गए तथा 1949 में वकालत शुरू की। 
1952 में सोशलिस्ट पार्टी से सुल्तानपुर लोकसभा सीट से लड़े। इसी बीच 1954 में मजिस्ट्रेट भी बने, लेकिन चार साल के अंदर ही 1958 में सरकारी नौकरी से रिजाइन कर फिर वकालत शुरू कर दिया। इरादा राजनीति में जाने का था। 1962 के यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट से विधायक बने। फरवरी से अक्टूबर 1970 तक चरण सिंह के मंत्रिमंडल में रहे। अप्रैल 1971 तक त्रिभुवन नारायण सिंह के मंत्रिमंडल में रहे तथा सरकार में एजुकेशन मिनिस्टर बने।
1970 से 1976 तक वो विधान परिषद में रहे फिर 1982 में श्रीपति मिश्र जी मुख्यमंत्री बने, दो वर्षों तक मुख्यमंत्री रहने के बाद 1985 से 1989 तक मछलीशहर से सांसद रहे। श्रीपति मिश्र जी का निधन  2002 में बलरामपुर हॉस्पिटल में हुआ। 


वीर बहादुर सिंह

(जन्म- 18/01/1935 मृत्यु: 30/05/1989)

18 जनवरी 1935 को जन्मे वीर बहादुर सिंह जी सितम्बर 1985 से जून 1988 तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। वीर बहादुर छात्र राजनीति से निकले नेता थे। वे जिला युवा कांग्रेस गोरखपुर के संयोजक भी रहे।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य रहने के साथ उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री भी रहे थे। 1967 में गोरखपुर के पनियारा निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा सदस्य बने। दोबारा 1969, 1974,1980 और 1985 तक पांच बार उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य निर्वाचित हुए।  वीर बहादुर सिंह जी 1988-89 तक राज्य सभा के सदस्य भी रहे। साल 1970, 1971-73 और 1973-74 तक उपमन्त्री रहे। इसके बाद 1980 में वी पी सिंह की सरकार में मंत्री बने और फिर 24 सितम्बर 1985 से 24 जून 1988 के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। 1988 से 1989 तक केन्द्रीय संचार मंत्री का पद  ही सम्भाला। 1990 में पेरिस यात्रा के दौरान वीर बहादुर जी का निधन हो गया।