संपर्क और संघर्ष से मजबूत होगी कांग्रेस

सोनभद्र के उम्भा गांव में 17 जुलाई को जमीन विवाद में हुए नरसंहार के बाद सबसे पहले मौके पर पहुंचने वाले नेता कुशीनगर के तुमकुहीराज से विधायक अजय कुमार लल्लू ही थे. इन्हीं की पहल पर कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी सोनभद्र में नरसंहार पीडि़तों से मिलने पहुंचीं और यूपी में भाजपा की सरकार को बैकफुट पर ला दिया. इसके बाद 40 वर्षीय अजय कुमार प्रदेश में लगातार प्रियंका गांधी के साथ हर कार्यक्रम में नजर आए. संघर्षशील युवा नेता की पहचान रखने वाले कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार अब यूपी कांग्रेस कमेटी के नए अध्यक्ष हैं.

उन्होंने कुशीनगर में किसान पी.जी. कालेज सेवरही से छात्र राजनीति शुरू की और वर्ष 2000 में यहां छात्रसंघ अध्यक्ष बने. पिछड़ी जाति मधेसिया से ताल्लुक रखने वाले अजय कुमार वर्ष 2008 में कांग्रेस में शामिल हुए. वे वर्ष 2012 और 2017 में तुमकुहीराज से विधायक चुने गए. गुजरात और मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनावों में कांग्रेसी उम्मीदवारों के चयन में उन्होंने अहम भूमिका निभाई. अब उन पर यूपी में 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की नैया पार लगाने की कड़ी चुनौती है. कांग्रेस की रणनीति के बारे उन्होंने असिस्टेंट एडिटर आशीष मिश्र से चर्चा की.

यूपी में कांग्रेस को कैसे खड़ा करेंगे?

राजनीति में मेरे तीन मूल सिद्धांत रहे हैं-संपर्क, संवाद और संघर्ष. इसी के आधार पर मैंने संगठन और राजनीति में कार्य किया है. जनसरोकार के मुद्दों को अधिक मजबूती से उठाने का प्रयास किया जाएगा.
कांग्रेस जनता का विश्वास खोती जा रही है?
ऐसा नहीं है. सोनभद्र का नरसंहार, उन्नाव में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर या शाहजहांपुर में बेटी के न्याय की घटना हो, इन सभी प्रकरण पर कांग्रेस ने मजबूती के साथ जनता की आवाज को उठाया है.

यूपी में कांग्रेस दूसरी पार्टियों की पिछलग्गू बनती जा रही है?

प्रदेश में जो 11 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होने जा रहे हैं उन पर कांग्रेस अकेले चुनाव लड़ेगी. कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी. वह किसी से गठबंधन नहीं करेगी, अपने विचार और कार्यकर्ताओं के दम पर विपक्षियों को पटखनी देगी.

कांग्रेस के कार्यक्रमों, आंदोलनों में निरंतरता नहीं देखी गई है?

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जनपदवार पार्टी संगठन के लोगों से चर्चा के बाद जो भी जनसरोकार के मुद्दे हैं उनको निरंतर उठाकर संघर्ष का रास्ता अख्तियार करेंगे. प्रियंका गांधी जी यूपी में सबसे ज्यादा समय देकर संघर्ष और संपर्क की रणनीति बना रही हैं. इससे कांग्रेस सभी चुनौतियों का सामना कर सकेगी.

पार्टी का पूरा फोकस पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर है?

शाहजहांपुर तो पश्चिमी यूपी में आता है जहां की बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई कांग्रेस पार्टी लड़ रही है. प्रियंका गांधी पूरे प्रदेश की प्रभारी हैं. वो हर जनपद से फीडबैक ले रही हैं. लोकसभा चुनाव के बाद अब तक वे 9,000 से ज्यादा लोगों से व्यक्तिगत मिल चुकी हैं.

क्या यूपी में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रियंका गांधी मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार होंगी?

यह तो राष्ट्रीय नेतृत्व को तय करना है. लेकिन जगह-जगह बैरिकेडिंग लगाने, नेताओं को घरों से उठाने के बावजूद शाहजहांपुर में 3,000 से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे थे. इसके बाद लखनऊ में प्रियंका गांधी के नेतृत्व में 40,000 से अधिक लोगों ने शाहजहांपुर की बेटी को न्याय दिलाने के लिए पदयात्रा की थी. इससे पता चलता है कि कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं में जोश और विश्वास बढ़ा है. इससे आगे की राह आसान होगी.

कुछ कांग्रेसी नेता और विधायक भाजपा के संपर्क में हैं?

पार्टी के भीतर जो भी अनुशासनहीनता करेगा चाहे, वह कितना ही बड़ा नेता या प्रभावशाली क्यों न हो, उसपर कार्रवाई की जाएगी. पार्टी में अनुशासन प्राथमिकता है. पार्टी और संगठन को मजबूत बनाने के लिए जरूरी और कड़े कदम भी उठाए जाएंगे.

भाजपा की जातीय गोलबंदी की राजनीति की कांग्रेस के पास क्या कोई काट है?

कांग्रेस में संगठन का जो नया प्रारूप आया है उसमें सभी जातियों और सभी लोगों का समान रूप से समावेश है. कई पिछड़़ी जातियां, ब्राह्मण, मुसलमान और दलित पूर्व में काग्रेंस पार्टी के मतदाता रहे हैं. इनसे निरंतर संवाद, संपर्क और जनता के मुद्दों पर लगातार संघर्ष करके कांग्रेस पार्टी आगे बढ़ेगी.

AKL

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